Posts

Showing posts with the label झारखण्ड

वृक्ष कम होंगे तो कम होगा आक्सीजन .

झारखण्ड में प्रदुषण बढ़ने का भी खतरा होगा. द्वारा डा. नितीश प्रियदर्शी आज पुरे विश्वा में जंगल का विनाश हो रहा हे. जंगल में लगी आग के रूप में या जंगल की कटाई के रूप में . वृक्ष हमारे वातावरण को संतुलित करते हैं. एवं जल चक्र को बनाये रखने में भी सहायक होता है. यह भू छरण को भी रोकता है. जंगल के विनाश से इनपर तो असर हो रहा हे किन्तु सबसे खतरनाक असर हमारे वातावरण में मौजूद प्राणवायु आक्सीजन पर दिख रहा है अब माना जाने लगा है की वृक्षों के कम होने से वायुमंडल में मौजूद आक्सीजन (२० %) में भी कमी होगी जो मनुष्य एवं दूसरे जंतुओं के लिये भी खतरनाक संकेत है. वृक्ष प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा वातावरण से कार्बन ड़ाइओक्सइड को लेकर आक्सीजन मुक्त करते है. इस आक्सीजन को जीव जीवित रहने के लिये ग्रहण करते है. पृथ्वी पर वृक्षों की यदि कमी होने लगेगी तो निश्चित रूप से इसका असर आक्सीजन की मात्र पर होगा. वृक्ष के केवल कटने से ही नहीं; जंगल में आग लगने से भी आक्सीकरण की कमी हो सकती हे क्योंकि जलने से भी आक्सीजन का इस्तेमाल होता है. आज जिन पौधे या वृक्षों के बदौलत हमारे पृथ्वी पर आक्सीजन है हम उन्ही क...

झारखण्ड एवं बिहार के भूमिगत जल में फैल रहा है आर्सेनिक का जहर I

Image
बहुत सारे छेत्रों में अपना प्रभाव दिखा रहा है I द्वारा डा. नितीश प्रियदर्शी आर्सेनिक शब्द का नाम आते ही नेपोलियन की याद आती है जिनके बारे में यह कहा जाता है की उनको आर्सेनिक का जहर देकर मारा गया था I देश के कई भागों में आर्सेनिक युक्त जल पीने के कारण लोग कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, झारखण्ड तथा बिहार के अनेक गांवों में भूजल में आर्सेनिक तत्व पाए जाने की पुष्टि वैज्ञानिकों ने की है। पश्चिम बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद, वर्धमान, नाडिया, हावड़ा, हुगली, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और कोलकाता जिलों के लोग इस पानी को पीने से विभिन्न रोगों के शिकार हो रहे हैं। पूरे विशव मे करीब बीस मिलियन लोग इससे प्रभावित है , कई तरीकों से इससे उत्पन्न हुये रोगों से निजात पाने की चेष्टा की गयी लेकिन अभी तक कोई ठॊस परिणाम सामने नही आये हैं । आज पश्चिम बंगाल के कई जिले इस जहर से प्रभावित हैं. वहां के भूमिगत जलों में आर्सेनिक की मात्रा खतरनाक स्तिथि तक पहुँच चुकी है I हजारों लोग इससे प्रभावित है I बिहार एवं झारखण्ड के भी कई जगहों पर यह जहर यहाँ के भूमिगत जल में तेजी से फैल रहा है....

भारत में प्राकृतिक आपदाएं - कितने तैयार हैं हम ?

Image
देश के २२ राज्यों को मल्टीडिजास्टर प्रोन यानि जहाँ की एक से अधिक प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं, माना गया है I द्वारा डा. नितीश प्रियदर्शी विश्व में प्राकृतिक आपदाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है I पहले दक्षिण पूर्व एशिया सुनामी, अमरीका में आये तूफ़ान, कटरीना, विल्मा, मुंबई की बाढ़, पाकिस्तान एवं जम्मू कश्मीर में आये विनाशकारी भूकंप , बिहार में कोसी नदी की बाढ़ और अब पाकिस्तान में बाढ़, दिल्ली, गुजरात, पंजाब, लेह, उत्तराखंड, राजस्थान इत्यादि में बाढ़ I झारखण्ड एवं बिहार में सुखा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है की केवल सुचना ही आपदाओं से निपट पाने के लिये पर्याप्त नहीं है I इनसे निपटने के लिये बहुत कुछ किया जाना बाकि है I भारतीय उप महाद्वीप का लगभग सारा का सारा हिस्सा कभी न कभी प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आ ही जाते हैं या आ सकते हैं लेकिन इनसे निपटने के लिये जिस प्रकार से शार्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कदम उठाये जाने की जरुरत हे उनके बारे में मामले सरकारी फाइलों में बंद हैं I भारतीय उप महाद्वीप में आनेवाली प्राकृतिक आपदाओं में प्रमुख हैं सूखा, बाढ़, समुद्री तूफान, भूकंप, भूमि धसान,जंगलों एवं कोय...

क्या है समुद्र के नीचे लेमुरिया महाद्वीप का रहस्य?

Image
क्या है समुद्र के नीचे लेमुरिया महाद्वीप का रहस्य ? क्या बदलते तापमान ने इन्हे डुबाया ? झारखण्ड की मुंडा जाती भी शायद इसी महाद्वीप से होते हुए भारत पहुँची। द्वारा डा। नितीश प्रियदर्शी आज सारे विश्व के वैज्ञानिक इस बात पर सहमत हैं की आने वाले समय में पृथ्वी पर कई विनाशकारी बदलाव होंगे। कारन है ग्लोबल वार्मिंग । कई छोटे द्वीप समुद्र में समां जायंगे । कहीं सूखे की मार होगी तो कहीं अतिवृष्टि । कई नए जगह भूकंप प्रभावित होंगे जो पहले नही थे । यानि विनाश का एक नया रूप सामने आएगा। कुछ खोजकर्ता इस बात का दावा कर रहें हैं की माया सभ्यता के कैलेंडर मे इस बात का जिक्र है की सन २०१२, २१ दिसम्बर को पृथ्वी का विनाश हो जाएगा।ऐसी बात नही हे की आने वाले समय में ही विनाश होगा । विनाश अगर होगा भी तो अचानक नही । विनाश की प्रक्रिया धीरे धीरे होती है जैसे पहले हुई थी । जब से पृथ्वी बनी है विनाश के कई चरण हुए है जब कई प्रजातियाँ विलुप्त हुई तथा नई आई हैं। विश्व के सभी जातिओं एवं धर्मो में प्राचीन महाप्रलय का उल्लेख मिलता है । केवल धर्मं ही नही भूवैज्ञानिक साक्ष्य भी पृथ्वी पर कई प्राचीन विनाशकारी हलचल को दर्श...